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पर्यटकों के लिए बंद हुई विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी, अब जून से उठा पाएंगे यहाँ के सौंदर्य का लुत्फ

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी पर्यटकों की आवाजाही के लिए बृहस्पतिवार(आज) से बंद हो गई है। फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों के लिए खुली थी व शीतकाल में अत्यधिक बर्फबारी के चलते आवाजाही के लिए बंद हो जाती है। चार माह तक पर्यटक यहां सैर-सपाटे के लिए पहुंचते हैं। अब सैलानी अगले साल जून में घाटी की सैर कर वहां के सौंदर्य का लुत्फ उठा पाएंगे। 

चमोली: नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी पर्यटकों की आवाजाही के लिए बृहस्पतिवार(आज) से बंद हो गई है। फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों के लिए खुली थी व शीतकाल में अत्यधिक बर्फबारी के चलते आवाजाही के लिए बंद हो जाती है। चार माह तक पर्यटक यहां सैर-सपाटे के लिए पहुंचते हैं। अब सैलानी अगले साल जून में घाटी की सैर कर वहां के सौंदर्य का लुत्फ उठा पाएंगे।

फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती का कहना है कि बृहस्पतिवार को फूलों की घाटी आम पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद कर दी गई है।  इस वर्ष फूलों की घाटी के दीदार 17424 पर्यटकों ने किए। इसमें 16904 भारतीय व 520 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। वहीं पर्यटकों की आवाजाही से पार्क प्रशासन को 27 लाख 60 हजार 825 रुपये की आय प्राप्त हुई है। अब पर्यटकों को सैर-सपाटे के लिए घांघरिया तक जाने के लिए भी जोशीमठ और गोविंदघाट में नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि सर्दियों में फूलों की घाटी की सुरक्षा के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन पुख्ता व्यवस्था करने जा रहा है। इसके तहत घाटी में 12 कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे। इसके अलावा घाटी में गश्त भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए 14 वन कर्मियों की टीम बनाई गई है।

बता दें साल 1982 में घाटी को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और वर्ष 2005 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया। यह गढ़वाल क्षेत्र के चमोली जिले में स्थित है और समुद्रतल से करीब 12500 फीट की ऊंचाई पर 87.50 किमी वर्ग क्षेत्र में फैली है। वहीं  प्रकृति प्रेमियों के लिए यह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हिमालय श्रृंखला की यह घाटी फूलों की विभिन्न प्रजातियों से मौसम के अनुकूल गुलजार रहती हैं। यहां दुर्लभ प्रजाति के फूल, वन्य जीव-जंतु, जड़ी-बूटियां और पक्षी पाए जाते हैं। कहा जाता है कि लक्ष्मण की रक्षा के लिए हनुमान यहां संजीवनी लेने आए थे। इस घाटी में फूलों की 521 प्रजातियां हैं। साल 1931 में फूलों की घाटी की खोज ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेंकस्मिथ ने की थी। उन्होंने वैली ऑफ फ्लावर नाम की पुस्तक की रचना भी की।

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