इस बार वनों को आग से बचाएगी 109512 की फौज, वन महकमे ने रूपरेखा की तैयार

देहरादून। 71 फीसदी वन भूभाग वाले उत्तराखंड में आरक्षित वन क्षेत्रों का लगभग 42 फीसदी क्षेत्र आग के लिहाज से संवेदनशील है। जिसमें से तीन फीसदी अति संवेदनशील और नौ फीसद मध्यम संवेदनशील श्रेणी में है। संवेदनशील वन क्षेत्रों को आग से बचाए रखने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। इस बार आग बुझाने में ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग लिया जाएगा।

इस बार फायर सीजन के दौरान वन महकमे के पास जंगलों को आग से बचाने के लिए पर्याप्त मानवशक्ति रहेगी। दावानल पर नियंत्रण में वन पंचायतें अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसीलिए विभाग ने पहली बार दावानल नियंत्रण में राज्य की 12168 वन पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। प्रत्येक वन पंचायत में नौ लोगों की टीम रहेगी। इस तरह विभाग को 109512 लोगों की फौज की मदद मिल जाएगी। इसके एवज में महकमे ने दावानल नियंत्रण में बेहतर योगदान देने वाली वन पंचायतों को प्रोत्साहन देने के साथ ही वहां रोजगारपरक कार्यक्रमों में तेजी लाई जाएगी। उम्मीद जताई जा रही कि वन विभाग की इस पहल से जंगल अधिक महफूज रहेंगे।

बता दें उत्तराखंड ऐसा अकेला प्रदेश है, जहां वन पंचायतों की व्यवस्था है। 2387.991 वर्ग किलोमीटर में फैले वनों का जिम्मा पूरी तरह से 12168 वन पंचायतें संभाले हुए हैं। ये अपने अधीन वनों के संरक्षण के साथ ही उन्हें पनपाने में अहम योगदान दे रही हैं। अभी तक फायर सीजन में वन पंचायतें अपने अधीन वन क्षेत्रों की आग से सुरक्षा करती आई हैं।

वन विभाग के राज्य स्तरीय प्रवक्ता (वनाग्नि) आरके मिश्रा के अनुसार वन पंचायतें सीधे तौर पर वनों से जुड़ी हैं, इसलिए विभाग उनके इस अनुभव का लाभ उठाएगा। उन्होंने बताया कि दावानल पर नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाने वाली वन पंचायतों को प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अलावा ग्रामीणों का भी सक्रिय सहयोग लिया जाएगा।

संवेदनशील क्षेत्र

श्रेणी——————-क्षेत्र (हेक्टेयर में)
अति संवेदनशील———90700
मध्यम संवेदनशील——222370
संवेदनशील—————792900

प्रदेश में वन पंचायतें

जिला————–संख्या
पौड़ी————–2450
अल्मोड़ा———-2324
पिथौरागढ़——–1621
चमोली———–1509
टिहरी————1290
बागेश्वर———-822
चंपावत————654
रुदप्रयाग———-509
नैनीताल———–413
उत्तरकाशी——–406
देहरादून———–170