आप भी सुने गढ़वाल राइफल का रेजिमेंटल गीत बढ़े चलो गढ़वालियों बढ़े चलो-देखें विडियो

Mussoorie: इन दिनों सोशल मीडिया पर गढ़वाल राइफल्स के वीर जवानों का रेजीमेंटल सांग ‘बढ़े चलो गढ़वालियों बढ़े चलो, दिल में जिगर आंख में काल चाहिए, तलवार चाहिए ना कोई ढाल चाहिए, गढ़वालियों के खून में उबाल चाहिए…हर किसी में जोश भर रहा है. अब तक लाखों लोग इसे लाइक और शेयर भी कर चुके हैं.

आमतौर पर जब आप लैंसडाउन जायेंगे तो इस गीत को गढ़वाल राइफल के जवानों को गुनगुनाते देख लेंगे. इस गीत के बोल ही ऐसे हैं कि आपके दिल में गढ़वाल राइफल के लिए सम्मान पैदा करेंगे। ‘तुमको अमर बदरी विशाल लाल की कसम..निज पूर्वजों की आन-बान-शान की कसम..जननी धरा वसुंधरा गढ़वाल की कसम..बढ़े चलो गढ़वालियो बढ़े चलो. दरअसल, एक मिनट के इस वीडियो में अपने प्रशिक्षक के साथ तमाम रिक्रूट जोशीले अंदाज में ‘बढ़े चलो गढ़वालियो बढ़े चलो’ गीत गा रहे हैं. प्रशिक्षक भी अपने रिक्रूटो में जोश भर रहे हैं। बताया जा रहा है कि गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर में सालभर का कड़ा सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पासिंग आउट परेड की तैयारी कर रहे रिक्रूट को रिहर्सल के दौरान यह वीडियो तैयार की गई है, जो आजकल खूब पसंद किया जा रहा है.

जय हो बदरी विशाल के उद्घोष के साथ जोशीले अंदाज में इसी गीत को गुनगुनाते हुए गढ़वाल राइफल्स के वीर सपूत काल बनकर दुश्मन पर टूट पड़ते हैं. रेजीमेंटल सेंटर में आयोजित होने वाली पासिंग आउट परेड व ओथ सेरेमनी में भी अक्सर जोश भरा यह गीत गाकर रिक्रूट सरहदों की हिफाजत को आगे बढ़ निकलते हैं. गढ़वाल राइफल के इस गीत से मन में देशभक्ति का भाव उफान मारता है.

वैसे तो हमारे देश की आर्मी की हर रेजीमेंट व बटालियन का अपना गौरवशाली इतिहास है, लेकिन गढ़वाल राइफल्स का जो इतिहास है वह स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है. अल्मोड़ा में मई 1887 में गढ़वाल राइफल्स के नाम से इस बटालियन का गठन हुआ था. बाद में जिसे लैंसडौन में भेजा गया. जो वर्तमान में गढ़वाल राइफल्स का रेजीमेंटल सेंटर है. गठन के बाद से गढ़वाल राइफल्स के जवानों की वीरता का अपना स्वर्णिम इतिहास रहा है.

आप भी सुनिए और जोश से गाइए…बढ़े चलो गढ़वालियों बढ़े चलो……….