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देशभर के कामगारों को झटका, मोदी सरकार ने वापस लिया पुराना निर्देश, उद्योग जगत को राहत

New Delhi: मोदी सरकार ने देशभर के कामगारों को झटका दिया है. कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो गया है. सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का अपना पुराना निर्देश वापस ले लिया है. यानी अब कंपनियां इसके लिए बाध्य नहीं होंगी कि लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरी सैलरी दें. इस कदम से कंपनियों और उद्योग जगत को राहत मिली है.

कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपना पुराना फरमान वापस लेने का ऐलान कर दिया. सरकार ने कर्मचारियों का पूरा वेतन देने वाला अपना पुराना आदेश वापस ले लिया. ऐसे में अब कंपनियां बाध्य नहीं होगी कि व कर्मचारियों को पूरा वेतन दें। सरकार के फाइल्स से उद्योगियों को राहत मिली है.

गौरतलब है कि गृह सचिव अजय भल्ला ने लॉकडाउन लगाए जाने के कुछ ही दिन बाद 29 मार्च को जारी दिशानिर्देश में सभी कंपनियों व अन्य नियोक्ताओं को कहा था कि वे प्रतिष्ठान बंद रहने की स्थिति में भी महीना पूरा होने पर सभी कर्मचारियों को बिना किसी कटौती के पूरा वेतन दें. कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए देश भर में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है. अब 18 मई से लॉकडाउन का चौथा चरण लागू हो चुका है.गृह मंत्रालय ने तब यह भी निर्देश दिया था कि उन मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो लॉकडाउन के दौरान किराया न दे पाने वाले स्टूडेंट्स या प्रवासी कामगारों को मकान खाली करने के लिए दबाव बना रहे हों.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक आदेश में कहा था कि सरकार लॉकडाउन के दौरान पूरी सैलरी न दे पाने वाली कंपनियों पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करे. कर्नाटक की कंपनी फिकस पैक्स प्राइवेट लिमिटेड ने सरकार के इस आदेश को चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया.

निजी कंपनियों का कहना था कि यह आदेश मनमानी वाला है और इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1) (g) जी का उल्लंघन होता है, जिसमें उन्हें कारोबार या व्यापार करने की गारंटी दी गई है.

गृह सचिव अजय भल्ला ने अपने रविवार को दिए आदेश में कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत नेशनल एक्जिक्यूटिव कमेटी (एनईसी) की धारा 10(2) (1) को प्रभावी किया जा रहा है। यह नियमावली 18 मई से लागू है. रविवार को जारी गाइडलाइंस के तहत 6 सेटों का प्रोटोकॉल जारी किया गया है. उन्होंने चौथे चरण की गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा कि एनईसी ने 24 मार्च, 29 मार्च, 14 अप्रैल, 15 अप्रैल और एक मई को विशेष रूप से कहा था कि लॉकडाउन के दौरान किसी भी कर्मचारी को नौकरी से न निकाला जाए. साथ ही उनके वेतन में भी कोई कटौती न हो. इस अवधि में कंपनी के आय के साधन बंद होने के बावजूद उन्हें पूरा वेतन दिया जाए. लेकिन अब सरकार ने अपने इसी आदेश को वापस लेते हुए कहा कि संकट के इस समय में कंपनियां को पूरा वेतन देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा.

गृह मंत्रालय के न​ए निर्देश में कहा गया है कि, ‘जहां तक इस आदेश के तहत जारी परिशिष्ट में कोई दूसरा प्रावधान नहीं किया गया हो वहां आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 10(2)(1) के तहत राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा जारी आदेश 18 मई 2020 से अमल में नहीं माने जाएं.’

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